Chapter 2 · Page 1 of 4Overall 5 / 45 · preview 5
राज उस लड़की के तरफ देखते हुए बोलता है"नहीं भाई मुझे नही खेलना तुम सब जाओ खेलो।"
उसका दोस्त राज को अमीषा के तरफ देखते हुए देख कर बोला "ओ तो ये बात है?अपने बगल वाले क्लॉस में रहती है अमीषा नाम है मेरे ही घर के बगल में रहती है!अभी हालही में इसकी मां का देहांत हो गया और इसके पापा भी पहले ही चल बसे अब सिर्फ अकेली यही है,,,बेचारी।"ये सुनते ही राज के रोंगटे खड़े हो गए और उसके दिल में अमीषा के लिए दया आ गई। और वो हमदर्द भरी नजरो से उसे देखने लगा पर वो अमीषा से बात कैसे करेगा ?किस बहाने से उसके पास जाए? ये सोच कर जैसे तैसे हिम्मत करके उसके पास गया।और उसके बगल में बैठ गया।
अपने बगल में उसे बैठते देख अमीषा अपने आंसू पोछने लगी तभी राज बोला"रहने दो ऐसे आंसू बह जाए तो ही अच्छा है"
राज की बात सुन कर अमीषा चुप्पी साधकर वही उसी हालत में बैठी रहीं।और मासूमियत भरी आंखों से उसके तरफ देखने लगी।