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त्रिशा एक तरफ आइने के सामने अपने फेशियल एक्सप्रेशन को देख रही थी की कही उसने ऑडिशन देते टाइम कुछ गलती तो नही कर दी?
"अरे फ्यूचर की माधुरी दीक्षित बस भी करो इतने साल हो गए पर अब तक तुम्हें कोई फिल्म में हीरोइन का रोल तो छोड़ो कोई साइड रोल भी नही मिला।"त्रिशा की रूममेट शालिनी कहती है।
शालिनी के ये बोलते ही वही पास में बैठ उसकी दूसरी रूमेट मधु भी ठहाके मारके हसने लगती है।
"अरे यार जो तू सोच रही है ना की तू अपने टैलेंट और अपने स्ट्रगल के जरिए हीरोइन बन जाएगी तो ये तेरा बहम है। यहां नाम बनाने के लिए किसी के बिस्तर को गर्म करना पड़ता है।,तब जा के सायद कोई काम मिलता है और तू तो ये सब करने से रही।"मधु बोलती है।
मधु की बात सुन कर त्रिशा अंदर से एक दम टूट गई और कुछ न बोलते हुए वहा से बाहर निकल कर चली गईं।
वही दूसरी तरफ अर्जुन रॉय अपने ऑफिस में बैठ कर कॉफी पीते हुए सामने कंप्यूटर में ऑडीशन के विडियोज देख था था।उसी बीच विवेक पटेल (कास्टिंग डायरेक्टर )आता है।