Chapter 1 · Page 2 of 5Overall 2 / 5
लैम्प पोस्ट के नीचे खड़े पापा अब गायब थे।
लेकिन...
अब वहाँ कोई और खड़ा था।
लंबा।
बहुत लंबा।
इतना लंबा कि उसका सिर लैम्प की रोशनी से ऊपर अंधेरे में गायब हो रहा था।
और वह धीरे-धीरे...
मेरे घर की तरफ मुड़ रहा था।
तभी मेरे कमरे का दरवाज़ा खटखटाया।
ठक... ठक... ठक...
मैंने राहत की साँस ली।
शायद पापा ऊपर आ गए होंगे।
फिर दरवाज़े के बाहर से पापा की आवाज़ आई—
"बेटा, दरवाज़ा खोलो।"
लेकिन उसी पल...
मेरे मोबाइल पर व्हाट्सऐप नोटिफिकेशन आया।
पापा का मैसेज था।
"मैं अभी नाइट शिफ्ट में फैक्ट्री में हूँ। घर पर कोई नहीं है।"
मेरी आँखें स्क्रीन पर जम गईं।
फिर धीरे-धीरे...
मैंने कमरे के दरवाज़े की ओर देखा।
बाहर खड़ा कौन था?
और अगर घर में कोई नहीं था...
तो दरवाज़ा खटखटा कौन रहा था?
ठक... ठक... ठक...
इस बार आवाज़ और पास से आई।
फिर दरवाज़े के नीचे की दरार से...
किसी ने अपनी उँगलियाँ अंदर सरकानी शुरू कर दीं।
उँगलियाँ इंसान जैसी नहीं थीं।
बहुत लंबी।
बहुत पतली।
और उनके नाखून ऐसे थे जैसे कई सालों से काटे ही न गए हों..
मेरी साँसें रुक गई थीं।